सोनाक्षी सिन्हा तू हैं तो आखिर एक औरत: अमीर हाशमी

चलिए एक आसान सवाल मेरा भी:
एक अच्छे डॉक्टर से आप क्या उम्मीद रखते हैं, यहीं ना कि वह दुनियाँ की किसी भी बीमारी का अनुमान लगाकर बेहतरीन इलाज कर सकें।

अच्छा एक और आसान सवाल,
एक अच्छे इंजीनियर, नेता या सी.ए. या वकील से क्या उम्मीद रखते हैं, यहीं ना कि वह अपने काम में बेजोड़ हो।

एक घटना बताता हूँ, न्यूटन की जब बिल्ली को बच्चा हुआ तो न्यूटन जैसे महान अविष्कारक ने एक अजीब काम किया। उसने बिल्ली के आने जाने के रास्ते से अलग एक और छोटा सा छेद कर दिया ताकी बिल्ली का बच्चा वहां से आ सकें। सुनकर मूर्खता लगती हैं ना कि आखिर बिल्ली का बच्चा भी तो उसी छेद से आ सकता था जिससे बिल्ली आती हैं, लेकिन दुनियाँ का सबसे महान ज्ञानी व्यक्ति न्यूटन ने ऐसी मूर्खता इसलिए नहीं कि क्योंकि वह मूर्ख था। बल्कि ऐसे गलती उससे इसलिए हुई क्योंकि वह अपने काम को लेकर इतना संजीदा था कि दूसरा कोई भी काम या विषय उसकी समझ से परे हो चुका था, इसे विज्ञान का जूनून कहें या आशिक़-ए-तालीम, यह वो मकाम हैं जो करोड़ों-अरबों में से किसी एक को मिलता हैं।

वरना तो आज देश में हालात यह है कि नुक्कड़ में बैठा मिडिल क्लास व्यक्ति अपने ही दर्जे के किसी दूसरे चाय पीने वाले अनजान व्यक्ति को अमेरिका में ट्रम्प के जीतने के फायदे गिनाने लगता है या अर्थव्यवस्था पर पूरे डेढ़ घंटे का प्रवचन, आखिर इतना समय हमारे पास आता कहां से है?

सोनाक्षी सिन्हा कला के क्षेत्र में न्यूटन की तरह हैं, बेस्ट एक्टर, बेस्ट डेब्यू एक्टर, सुपर स्टार ऑफ़ टुमारो, बेस्ट एक्टर फीमेल आइकॉन, बेस्ट एक्टर क्रिटिक्स इत्यादि राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित अभिनेत्री से आप क्या उम्मीद करेंगे?

यहीं ना कि वह अपना काम जुनून की हद तक करें। जी हां, यकीन कीजिये के.बी.सी. का वह सवाल सोनाक्षी के लिए उसे न्यूटन की बिल्ली के तरह था, जिससे एक सच्चे कलाकार को कोई लेना देना नहीं होता है। सोनाक्षी अपना काम अपनी पूरी ईमानदारी और जुनून से करती हैं। यहीं कारण है कि आज तक सवा सौ करोड़ की संख्या का यह देश जब भी टिकिट खरीदकर सिनेमाघरों में जाता है, सोनाक्षी से निराश नहीं होता हैं।

अपने घर में बैठकर इस नवयुग सीतासे आप क्या सवाल करेंगे? जो खुद अकीरा जैसी फिल्मों से नवयुवतियों को यह साबित कर चुकी हैं लड़कियां ज़रूरत पड़े तो ख़ुद अपने दम पर किसी भी मुसीबत से लड़ सकती है या देश को ज़रूरत पड़े तो अपना बलिदान तक दे सकती हैं। जिसने अपना ख़ुद का का काम हो नहीं पा रहा हैं वो दूसरों पर घर बैठे उंगली उठा रहें हैं।

नए भारत की सीता से घर में बैठा रावण सवाल पूछता है, बता तूने जवाब क्यों नहीं दिया, चल तेरी इज़्ज़त बाज़ार में उछलता हूँ क्योंकि तू हैं तो आखिर एक औरत.

– अमीर हाशमी

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